educational

purpose of education || शिक्षा का प्रयोजन

शिक्षा का प्रयोजन purpose of education बालक की क्रियाशीलता निरंतर किस के उद्देश्य की प्राप्ति की ओर उन्मुख रहती है । शिक्षा को भी इसी लिए ” सोद्देशय् प्रक्रिया” का रूप प्रदान किया गया है। शिक्षा के उद्देश्य जीवन के उद्देश्यों पर आश्रित है । जीवन के उद्देश्यों में समता नहीं होती परिणामस्वरूप शिक्षा के उद्देश्यों में भी विभिन्नता होती है। स्थान, समय एवं परिस्थिति तीनों मिलकर जीवन के जिन उद्देश्यों का निर्माण करती है उसी से शिक्षा के उद्देश्य भी निर्मित होते हैं ।

शिक्षा के माध्यम से मानव को जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति होती है। इसीलिए जीवन की पूर्णता के लिए उसके लक्ष्यों का समन्वय शिक्षा के उद्देश्यों के साथ होना अनिवार्य है । जीवन के लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा के उद्देश्य purpose of education सदैव निर्मित होते रहते हैं। दर्शनशास्त्र इन लक्ष्यों का निर्माण करता है। राष्ट्र की जिस मनोवृत्ति को दार्शनिकों ने राष्ट्र जीवन का लक्ष्य बनाया । उसी विचार-धारा के अनुरूप उसकी शिक्षा के उद्देश्यों का निर्माण एवं व्यवस्था हुई।

प्राचीन भारत का जीवन-लक्ष्य धर्म से अनुप्राणित था। अतएव आत्मा और परमात्मा की पहचान, चेतन, विश्व एवं आत्म-विकास की विचारधाराओं से शिक्षा व्यवस्थित हुई। प्राचीन स्पार्टा निवासियों ने राष्ट्र की सुरक्षा को जीवन का चरम लक्ष्य बना लिया था । इसलिए शिक्षा में देशभक्त सैनिक निर्माण की भावना का प्रश्रय मिला।

शिक्षा के आधार पर जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति होती है। जीवन के लक्ष्य की खोज एवं निर्धारण दार्शनिक करता है । विचार एवं सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप जीवन के लक्ष्य बदलते रहते हैं। दार्शनिक चिंतन, मनन, एवं तर्क के आधार पर समयानुकूल जीवन के लक्ष्यों में परिवर्तन कर नवीन लक्ष्यों का निर्धारण किया करते हैं। इस प्रकार स्पष्ट हो जाता है कि जीवन के लक्ष्यों का निर्धारण दर्शनशास्त्र का परम उद्देश्य है।

शिक्षा और दर्शन के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए हम सरलता से यह कह सकते हैं कि शिक्षा के उद्देश्य (जीवन के लक्ष्य) का निर्धारण दर्शनशास्त्र करता है। शिक्षा की पूर्णता के लिए ‘दर्शन- शास्त्र’ के आधार प्राप्त होते हैं। इसलिए दोनों के उद्देश्यों का ज्ञान प्राप्त किए बिना हम पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर सकते ।

इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि कोई भी राष्ट्र या देश या समाज अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा के उद्देश्य को निश्चित कर सकता है।
भारत में भी शिक्षा के उद्देश्यों को स्पष्ट करने की दृष्टि से व्यवस्थित प्रयास किए गए हैं। विभिन्न आयोगों, समितियों एवं विशेषज्ञ समूहों द्वारा इन्हें प्रतिपादित किया गया ।

शैक्षिक वित्त का अर्थ || meaning of educational finance

नवाचार के पांच आई | five I’s of innovation

need for innovation || नवाचार की आवश्यकता एवं उद्देश्य

शिक्षा का प्रयोजन purpose of education के कुछ मुख्य उद्देश्य निम्न है –

1. प्राकृतिक न्याय के प्रति आस्था का विकास करना।

2. नए ज्ञान – विज्ञान का द्वार खोलना।

3. भौतिक तथा सामाजिक पर्यावरण समझने की क्षमता पैदा करना तथा उसे अपेक्षित रूप से स्वस्थ सुंदर बनाने को उत्प्रेरित करना।

4. विकास की समस्याओं को हल करने का कौशल पैदा करना ।

5. कार्यानुभव के व्यावहारिक शिक्षण द्वारा छात्रों में स्वावलंबन की योग्यता पैदा करना।

6. सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा की सुविधा प्रदान करना।

7. मेधावी बच्चों की शिक्षा की विशेष व्यवस्था करना।

8. वर्गमुक्त अनौपचारिक शिक्षा तथा खुला विश्वविद्यालय की व्यवस्था कर शिक्षा को सार्वजनिक और सर्वसुगम बनाना ।

9. छात्रों में राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना।

10. छात्रों में देश प्रेम और अपनी संस्कृति के प्रती गौरव भाव का विकास करना।

11. छात्रों में नेतृत्व की क्षमता का विकास करना।

12. छात्रों में लिखने, बोलने की स्पष्टता की कला का विकास करना।

13. राष्ट्रीय आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करना।

14. राष्ट्रीय अपेक्षाओं के अनुरूप नागरिक तैयार करना।

15. शिक्षा को जीवनोपयोगी बनाना ।

16. धर्मनिरपेक्षता की भावना का सुदृढ़ीकरण।

शिक्षा

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