uses of water : पानी का उपयोग, पानी का सही उपयोग के लिए सुझाव

पानी का उपयोग (Uses of Water) : पानी के महत्व की चर्चा करते हुए पानी के उपयोग की बात पहले भी कही गई है पर फिर भी प्राथमिकता तथा व्यय की दृष्टि से पानी के उपयोग uses of water की बात करना अनुचित नहीं होगा।

भारत कृषि प्रधान देश है अतः उपलब्ध पानी का अधिकतम भाग कृषि पर ही व्यय होता है। उस पर भी बढ़ती आबादी के कारण पिछले दिनों से अधिक अन्न उपजाने की आवश्यकता हुई है, इससे कृषि कार्य हेतु और अधिक पानी व्यय होने लगा है। देश का लगभग 60-70 प्रतिशत से जल इस कार्य हेतु व्यय होता है। दूसरे स्थान पर उद्योगों अथवा है। 1 टन स्टील पिघलने में 200 घन लीटर, 1 टन निकिल के लिए 4,000 घन लीटर तथा 1 टन कागज के निर्माण के लिये 100 घन लीटर पानी की आवश्यकता होती है। मानव के लिए जल के निम्नलिखित उपयोग हैं :

 Importance of water || जल का महत्व,जल की उपलब्धता

मानव के लिए जल के उपयोग

1. घरेलू उपयोग :

खाना पकाने, कपड़े धोने, नहाने, पीने में जो पानी उपयोग में आता है उसे जल का घरेलू उपयोग uses of water कहते हैं। एक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए प्रतिदिन 2 से 2.5 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। भारत में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 150 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। घरेलू उपयोग में आने वाला जल स्वच्छ जल होना चाहिए। पालतू पशुओं के लिए पृथक से स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है। गाय को औसतन प्रतिदिन 30 से 80 लीटर पानी चाहिए। इस प्रकार हम देखते हैं कि हमारे दैनिक जीवन में जल का महत्वपूर्ण स्थान है।

2. सार्वजनिक कार्यों में जल का प्रयोग :

व्यक्ति की अपेक्षा आधुनिक समय में समाज का स्थान सर्वोपरि है। इसके कारण आज सामाजिक कार्यों के लिए अनेक सार्वजनिक स्थानों की मांग बढ़ गई है। सार्वजनिक स्थलों में विद्यालय, पंचायत भवन, मंदिर, मस्जिद, अस्पताल, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन, आदि की गणना की जाती है। इन स्थानों पर बने शौचालय, स्नानघर तथा उद्यानों व पार्कों में हरियाली रखने के लिए जल की आवश्यकता होती है।

3. औद्योगिक कार्यों में जल की आवश्यकता :

आधुनिक उद्योगों में भी जल की अधिक आवश्यकता होती है। अलग-अलग उद्योग में जल का उपयोग uses of water विभिन्न मात्रा में होता है। वस्त्र उद्योग में वस्त्र की धुलाई, रंगाई, छपाई के लिए अत्यधिक मात्रा में जल की आवश्यकता होती है। कागज, निकिल, स्टील, शराब आदि उद्योग जल के बिना चल नहीं सकते हैं। एक टन तांबा गलाने के लिए 5,00,000 लीटर, 1 टन पेट्रोल साफ करने के लिए 18,000 लीटर जल की आवश्यकता होती है। यह कारण है कि आधुनिक उद्योग नदियों या जलाशयों के किनारे स्थापित किए जाते हैं।

4. जल परिवहन :

परिवहन के साधनों में सबसे सस्ता जल परिवहन है । यह आजकल यातायात का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साधन बन गया है। संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में झीलों द्वारा प्रदान जल परिवहन सुविधा के कारण उद्योगों का विकास हुआ है। नहरों के द्वारा जल परिवहन की सुविधा के विकास के लिए भारत भी प्रयत्नशील है।

5. ऊर्जा उत्पादन में जल का उपयोग :

शक्ति के साधनों में जल भी प्रमुख साधन है। जल से ऊर्जा के रूप में जल विद्युत का उत्पादन आधुनिक वैज्ञानिकों की महान उपलब्धि है। यह ऊर्जा संसाधनों में सबसे सस्ता साधन है। इसको उत्पादन स्थल से दूरस्थ स्थानों तक पहुंचाना भी सरल है।

6. पशुपालन में सहायक :

पशुपालन में जल के अनेक कार्यों जैसे पशुओं को नहलाना, पिलाना, दूध के बर्तन साफ करना, हरी घास की सिंचाई आदि के लिए आवश्यकता होती है।

7. मत्स्य उद्योग में सहायक :

मछली एक बड़ी मानव जनसंख्या की उदर पूर्ति का साधन है। कुछ देशवासी पूर्ण भोजन के लिए मछली पर ही निर्भर हैं। मछली पालन जल के बिना संभव नहीं है।

8. औद्योगिक अवशिष्टों (Industrial Waste) के बहाव में सहायक :

उद्योगों में वस्तुओं का निर्माण होने के बाद अवशिष्ट पदार्थ बचते हैं। अधिकांश उद्योग इन पदार्थों को जल द्वारा बहाकर फैक्ट्री से बाहर नालियों के माध्यम से बहा देते हैं यदि ऐसा न करें तो इनका ढेर लग जाए। इनको बहाने के लिए अधिक जल की आवश्यकता होती है।

9. पर्यटन केंद्रों के विकास में सहायक :

पर्यटन केंद्र अधिकतर झील या तालाब के किनारे विकसित होते हैं। इनमें पर्यटकों को नौका विहार, तैराकी तथा अन्य जल क्रीड़ाएं कराने का अवसर प्राप्त होता है। इसके साथ ही इन केंद्रों पर पर्यटकों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी जल की आवश्यकता होती है।

पानी का सही उपयोग के लिए सुझाव:

पानी की उपलब्धता, अभाव एवं दुरुपयोग को देखते हुए पानी के सही उपयोग हेतु कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं:

1. पानी का आवश्यकतानुसार उचित एवं बुद्धिमता पूर्ण उपयोग करें। पानी अत्यंत सीमित है इसको कल के लिए बचाएं।

2. पानी का उचित संरक्षण करें। भारत में परंपरागत प्रणाली जिसमें टांके में वर्षा जल को इकट्ठा कर वर्षभर उपयोग में लाने की व्यवस्था है, उपयोग में लावें

3. पानी के दुरुपयोग को रोकें। अनावश्यक रूप से स्वस्छ जल को बहाकर व्यर्थ में न जाने दें।

4. पानी को प्रदूषित न करें। इससे जहां पानी का अभाव होता है वहीं प्रदूषित जल स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है।

5. हैंडपंप के पास पानी भरा न रहने दें तथा को  ढक कर रखें।

6. पानी व्यक्तिगत विषय नहीं है। इससे पूरे समाज और देश का हित-अनहित जुड़ा है। अतः मोहल्ला स्तर पर समितियाँ बनाकर जल की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास कीजिए।

पानी

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